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खबर-बाली सुग्रीव युद्ध व रावण सीता प्रंसग ने जनता को किया मोहित, पढ़े शब्बीर बोहरा की रिपोर्ट

मनासा। नलखेडा में चल रही रामलीला के आठवें दिन गांव के युवा कलाकारों ने रामलीला के मंच से बाली सुग्रीव युद्ध व हनुमान जी द्वारा माता सीता की खोज करने वाले प्रंसग का चरित्र चित्रण किया। इसमें भगवान द्वारा माता शबरी के जुटे बैर खाने हनुमान जी की भगवान राम से भेंट होने व सुग्रीव से मित्रता करवाने बाली सुग्रीव युद्ध बाली के मरणोपरांत किष्किंधा की महारानी तारा व अंगद द्वारा विलाप करने हनुमानजी द्वारा माता सीता की खोज करने व रावण सीता संवाद को रामलीला के मंच से प्रस्तुत किया।

माता शबरी कई वर्षों से भगवान राम व लक्ष्मण की प्रतिक्षा करती हैं। भगवान राम अपनी पत्नि सीता को ढूंढते ढूंढते माता शबरी की कूटीयां पहुंचते हैं। जहां शबरी उन्हें जुटे बैर खिलाती हैं। भगवान राम प्रेम के वशिभुत हो माता शबरी के जुटे बैर खाते है। भगवान शबरी को नवद्या भक्ति का ज्ञान देकर पंपापुरी की ओर चल देते हैं। जहा उनकी भेंट परम भक्त हनुमान से होती हैं। हनुमान जी भगवान राम से सुग्रीव की मित्रता करवाते हैं। इस दोरान किष्किंधा के राजा बाली व उनके छोटे भाई सुग्रीव के बीच भंयकर युद्ध होता है, इसमें भगवान झाड़ियों के पीछे छिपकर महाबली बाली का वध करते हैं। बाली को तीर लगने की सुचना मिलते ही महारानी तारा व अंगद विलाप करते हुए युद्ध क्षेत्र में पहुंचते हैं। जहां भगवान राम बाली व तारा का जीवन मरण का भ्रम दूर कर अपनी भक्ति प्रदान करते हैं। इस दोरान बाली सुग्रीव संवाद ने उपस्थित जनता को खुब आनंदित किया। 

मंच से रावण सीता संवाद ने उपस्थित जनता का देर रात बैठाए रखा। अशोक वाटिका में बैठी सीता को रावण शादी का प्रस्ताव देता है जिसे सीता ठुकरा देती है ऐसे में क्रोधित रावण सीता को तलवार दिखाते हुए डराता है। इस पर सीता रावण से कहती हैं कि है दुष्ट मुझे तो इस तलवार से क्या डराता है व्यर्थ ही तु अपना बल मुझ पर दिखाता है मैं तुझसे डरने वाली नहीं हूं यदि तु इतना ही बलशाली था तो क्यू नही ये बल तुने सीता स्वयंवर के समय शिव धनुष तोड़ कर दिखाया होता। मैं एक पतिवृता नारी हूं जो तेरे बल से डरने वाली नहीं हूं। रावण का अभिनय कमलेश शर्मा, सीता भरत कनेरिया, बाली कैलाश राठोर, सुग्रीव पंकज मोड, राम विजय शर्मा, लक्ष्मण कमलेश राठोर, हनुमान दशरथ शर्मा, शबरी सकुर डांसर, अंगद मयंक शर्मा, विभीषण हरिश शर्मा, अक्षय कुमार मुकेश जेन, जामवंत आदित्य सेन, लंकीनी बंटी शर्मा, त्रिजटा चन्द्र प्रकाश मोदी, कवि पंडित मदनलाल शर्मा व जगदीशचंद्र शर्मा ने किया। अतिथि कमलेश शर्मा, राधेश्याम पाटीदार, मांगीलाल धनगर, रामेश्वर पाटीदार, दीपक पाटीदार सहित बड़ी संख्या में महिला पुरूष उपस्थित थे।

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