मनासा। चित्रकूट से भगवान राम, भरत को मर्यादा व पिता का वचन जूटा नहीं हो वापस अयोध्या भेज देते हैं। भरत के अयोध्या जाने पर इधर राम अपनी पत्नि सीता व लक्ष्मण के साथ दक्षिण प्रदेश की तरफ चल देते हैं। जहां वन में विराजित ऋषि मुनी पंचवटी नामक सुन्दर स्थान पर राम को ठहरने का प्रस्ताव रखते हैं। पंचवटी में रावण की बहन सूर्पनखां पहुंचती है, जो राम व लक्ष्मण के सुन्दर रूप व कोमल शरीर को देखकर उन पर मोहित हो जाती है। जिनसे शादी का प्रस्ताव रखने पर राम व लक्ष्मण सूर्पनखां का प्रस्ताव ठुकरा देते हैं। शादी का प्रस्ताव ठुकराने से नाराज सूर्पनखां सीता को मारने पहुंचती है, जिसकी लक्ष्मण नाक व कान काट अंग भंग कर देते हैं। अवसर था गांव नलखेड़ा में हाथरस की तर्ज पर चल रही संगीतमय रामलीला का। जहां रामलीला के मंच से गांव के युवा कलाकारों ने सीता हरण प्रंसग का सजीव चरित्र चित्रण किया। इसमें कलाकार कैलाश राठोर ने रावण का सुन्दर अभिनय करते हुए सीता का अभिनय कर रहे भरत कनेरिया का हरण किया। अपनी बहन सूर्पनखां के कहने पर महाबली राक्षस खर-दूषण भगवान राम से युद्ध करते हुए मारे जाते हैं। सूर्पनखां त्रिलोक विजेता लंकापति रावण के दरबार में पहुंच अपना दूखडा सुनाती हैं। रावण मामा मारिच को मृग का रूप धारण करने की कहता हैं। जो पंचवटी पहुंचकर सुन्दर मृग का रूप धारण करता हैं। पंचवटी में विचरण कर रहे स्वर्ण के समान मृग की सुन्दरता को देख माता सीता अपने प्रभु श्रीराम से उसकी मृगछाला लाने की जिद करती हैं। जैसे ही राम व लक्ष्मण मृग के पिछे जाते हैं, इधर रावण साधु का रूप बनाकर माता सीता का हरण कर लेता हैं। रावण व सीता के बीच चले संवाद ने जनता को देर रात तक बैठाए रखा। इसी बीच गिध्द राज जटायू सीता को बचाने में अपने प्राण त्याग देते हैं। रावण माता सीता का हरण कर लंका ले जाता है, जहां अशोक वाटिका में बड़ी ही डरावनी व भयानक राक्षसी यों के बीच उन्हें रखता हैं। इस दोरान सूर्पनखां का अभिनय बंटी शर्मा, खर दूषण चन्द्र प्रकाश मोदी, मारिच पंकज मोड, जटायू हरिश शर्मा, राम भगवती प्रसाद कारपेंटर, लक्ष्मण भरत कारपेंटर, मंत्री का अभिनय कमलेश शर्मा, मयंक शर्मा, आदित्य सेन व कवि का पंडित मदनलाल शर्मा ने किया। अतिथि समाजसेवी प्रकाशचंद कनेरिया, ललित माहेश्वरी व चेनाराम पाटीदार उपस्थित थे।