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खबर-बाल विवाह प्रथा से मासूम बच्चों का बचपन गुम हो जाता-सुश्री रेणु ठाकुर

रामपुरा। बाल विवाह सदियों से चली आ रही ऐसी प्रथा है जिससे न केवल मासूम बच्चों का बचपन गुम हो जाता है। बल्कि सही समय पर होने वाला उनका शारीरिक सामाजिक एवं आर्थिक विकास भी बुरी तरह से प्रभावित होता है। उक्त बात शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय रामपुरा में उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार बाल विवाह प्रतिषेध कार्यक्रम में मुख्य वक्ता सुश्री रेणु ठाकुर ने कहे। अपने उद्बोधन में विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा की अगर बच्चों की सही समय पर शादी की जाए तो वें शारीरिक एवं मानसिक तौर पर परिपक्व होकर उच्च शिक्षा ग्रहण कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ देश के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देने में सक्षम होते है। उक्त अवसर पर वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो.जाकिर हुसैन बोहरा ने भी सम्बोधित किया। विद्यार्थियों ने बाल विवाह प्रतिषेध अंर्तगत पोस्टर बनाए एवं नारा लेखन किया। महाविद्यालय ने बाल विवाह प्रतिषेध हेतु जागरुकता अंतर्गत 02 छात्र एवं 02 छात्राओं यशवंत रेगर, दयाल भील, ज्योति माली, तनिषा कारा को कैम्पस एम्बेसडर नियुक्त किया। प्राचार्य डॉ.बलराम सोनी एवं स्टॉफ ने उक्त कार्य की सराहना की। कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय सेवा योजना के प्रभारी प्रो.आशीष कुमार सोनी ने किया एवं आभार कार्यक्रम संयोजक डॉ.सुषमा सोलंकी ने माना।

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